गाँव और शहर के युवाओं पर मोबाइल का असर
कभी गाँव की गलियों में सुबह की पहली किरण के साथ क्रिकेट खेलने की आवाज़ें गूंजा करती थीं, बच्चे मिट्टी में लथपथ होकर भी खुशी से झूम उठते थे। लेकिन आज, वही गलियाँ शांत हैं। अब वहाँ सिर्फ मोबाइल की रौशनी है, और युवाओं की आँखों में नीली स्क्रीन की चमक। यही हाल शहरों का भी है। Magadh Panthor Cricket Academy के अनुसार आज का युवा खेल के मैदान से दूर, मोबाइल की दुनिया में उलझा हुआ है।

Magadh Panthor Cricket Academy के कोचों का कहना है कि गाँव और शहर दोनों जगह के युवा अब पहले जैसे जोश से नहीं खेलते। पहले जहाँ गेंद की आवाज़ और बल्ले की थाप दिलों की धड़कन बनती थी, अब वहाँ सिर्फ नोटिफिकेशन की बीप सुनाई देती है। यह वही दौर है जहाँ खेल का मैदान खाली है, और इंटरनेट की दुनिया भीड़ से भरी हुई।
मोबाइल ने युवाओं की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। वे अब मैदान में नहीं, बल्कि रीलों और गेम्स में खुद को विजेता समझने लगे हैं। Magadh Panthor Cricket Academy के एक वरिष्ठ ट्रेनर कहते हैं — “आज के बच्चे बल्ला उठाने से पहले मोबाइल उठाते हैं, और बॉल फेंकने से पहले स्क्रीन पर स्वाइप करते हैं।” यह आदत अब एक बीमारी का रूप ले चुकी है।

गाँव के वो बच्चे जो कभी नंगे पैर भी घंटों खेला करते थे, अब उन्हें धूप में खड़ा होना मुश्किल लगता है। उनके शरीर कमजोर हो रहे हैं, उनकी आंखों की रोशनी कम होती जा रही है, और सबसे बड़ी बात – उनका ध्यान और धैर्य खत्म होता जा रहा है। यह सिर्फ मोबाइल की देन है। Magadh Panthor Cricket Academy ने कई बार जागरूकता अभियान चलाया कि बच्चे खेल में लौटें, लेकिन आकर्षण इतना गहरा है कि मोबाइल अब युवाओं का सबसे बड़ा साथी बन गया है – और यही उनका सबसे बड़ा दुश्मन भी।
Magadh Panthor Cricket Academy के प्रबंधक बताते हैं कि जब युवा सुबह उठते हैं, तो सबसे पहले सूरज नहीं देखते, बल्कि मोबाइल की स्क्रीन देखते हैं। पहले जहाँ दिन की शुरुआत वार्मअप और रनिंग से होती थी, अब वहीं दिन की शुरुआत ऑनलाइन वीडियो और सोशल मीडिया स्क्रोलिंग से होती है। नतीजा – शरीर कमजोर, दिमाग थका हुआ, और आत्मविश्वास पूरी तरह खत्म।
कभी खेल का मैदान इंसान को अनुशासन, संघर्ष और आत्मबल सिखाता था। लेकिन आज मोबाइल ने वह सब छीन लिया है। Magadh Panthor Cricket Academy का कहना है कि यह सिर्फ समय की बर्बादी नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य की बर्बादी है।

मोबाइल ने गाँव और शहर दोनों की सीमाओं को तोड़ दिया है, लेकिन यह तोड़ केवल कनेक्शन का नहीं, जीवन का भी है। अब बच्चों के पास खेलने का समय नहीं है, माता-पिता के पास बच्चों को प्रेरित करने का धैर्य नहीं, और समाज के पास उन्हें वापस मैदान में लाने की कोई योजना नहीं।
Magadh Panthor Cricket Academy युवाओं को यही संदेश देता है —
“जिस मिट्टी ने तुम्हें पाला है, उसी मिट्टी से दूर मत भागो। खेलो, दौड़ो, गिरो, उठो — यही असली जिंदगी है। मोबाइल सिर्फ पल भर की रोशनी देता है, मैदान जिंदगीभर की चमक।”
मोबाइल की गिरफ्त से बाहर निकलकर जब युवा फिर से मैदान में लौटेंगे, तभी फिर से वही पुराना जोश, वही मिट्टी की खुशबू, और वही जीवन की असली ऊर्जा लौटेगी। Magadh Panthor Cricket Academy के कोचों को आज भी भरोसा है कि हर युवा के अंदर एक खिलाड़ी अब भी जिंदा है — बस उसे मोबाइल की परतों से बाहर आने की जरूरत है।
Magadh Panthor Cricket Academy की यही पुकार है –
“स्क्रीन नहीं, मैदान चुनो – क्योंकि असली जीत वहीं है जहाँ पसीना बहता है।”
